Pracin Bharatiya Veshabhusha c11.s9.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c11.s9.1
- Language
- Hindi
c11.s9.1
इस युग में तरह तरह के कपड़ों की दूकानें होती थीं। लेकिन उनमें कुछ ऐसी भी दूकानें होती थीं जिनमें केवल एक ही प्रकार का कपड़ा मिल सकता था। प्राचीन शूर्पारक (आधुनिक सुपारा) में कुछ ऐसी दूकानों का उल्लेख है जिनमें केवल काशी के वस्त्र (काशिक वस्त्रावारि५५) अथवा छपे हुए कपड़े (फुट्टक वस्त्रावारि) मिलते थे५६। मदुरा में बजाजा होने का भी उल्लेख है। यहां दूकानों में तरह तरह के कपड़े तथा ऊन और सूत की पेटियां जिनमें हर पेटी में सौ लच्छे होते थे५७ मिल सकती थीं। कावेरी पट्टन में ऐसे बुनकर (कारुक) होते थे जो अपने काम के साथ ही साथ रेशमी तथा सूती कपड़ों और समूरों की दलाली भी किया करते थे५८।