Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s10: दक्षिणी स्त्रियों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s10
- Language
- Hindi
दक्षिणी स्त्रियों की वेश-भूषा
c12.s10.1
इस युग में दक्षिणी स्त्रियां बहुत हल्के कपड़े पहिनती थीं कमर के ऊपर शरीर का भाग खुला रहता था, साड़ी एंड़ी के ऊपर तक पहुंचती थी, इस पर करधनी और कमरबंद, जिसका एक छुट्टा हिस्सा आगे लटका रहता था और दूसरा मुड़ा हुआ हिस्सा आगे लहराया करता था, होते थे (आ० २५७)१४३। एक दूसरी जगह सकरमुढीदार कमरबंद करधनी का स्थान ग्रहण कर लेता है। (आ० २५८)१४४। कभी कभी स्त्रियां साड़ी के ऊपर करधनी, पटके और कमरबंद तीनों पहनती थीं। फेंटे के दोनों सिरे मुड़े होते थे और कमरबंद की फेरेदार गांठ कमर के बायें ओर लगी रहती थी । सिर पर पगड़ीके आकार का कोई वस्त्र होता था१४५। कभी कभी स्त्रियां लीलावश दुपट्टा हाथ में ले लेती थीं१४६।
c12.s10.2
१४३ वही, प्ले० ८५
c12.s10.3
१४४ वही, प्ले० ६१, ३
c12.s10.4
१४५ शिवराममूर्ति, वही, प्ले० ८, ३३
c12.s10.5
१४६ वही, प्ले० ८, १०
c12.s10.6
इस युग में दक्षिणी स्त्रियां बहुधा अपने सिर नहीं ढांकती थीं पर कभी कभी वे सुसज्जित पगड़ी पहनती थीं । इस तरह की एक भारी भरकम पगड़ी में चक्करदार फेंटे जूड़े के ऊपर बंधे हैं । पगड़ी के आगे एक बदामा शीर्षपट्ट है जिसमें एक झब्बा लटक रहा है (आ० २५९)१४७ । एक दूसरी तरह की पगड़ी में फेंटे एक सींगनुमा केशवेश के चारों ओर बंधे हैं (आ० २६०)१४८ । बाल बांधने की यह प्रथा आज दिन भी मध्यभारत के बनजारा स्त्रियों में पायी जाती है । कभी कभी पट्टीनुमा मुकुट जिसके दोनों ओर दो कुब्बों से झब्बे अथवा बाल की लटें लटकती थीं और जिसके ऊपर दोमुंहे मकर की आकृति अर्धचंद्र वहन करती थी पहना जाता था१४९। एक जगह इस मुकुट में दोहरे मुख वाले मकर का पूरा शरीर बना दिखाया गया है (आ० २६१)१५०। एक जगह चक्करदार मुकुट में एक कलंगी जैसा आभूषण लगा है (आ० २६२)१५१। कभी कभी स्त्रियां छः नोक वाला एक छोटा मुकुट पहनती थीं (आ० २६३)१५२। कभी कभी लहरियादार कमल की पंखुड़ियों से सजा मुकुट पहना जाता था (आ० २६४)१५३ ।
c12.s10.7
१४७ लोंगहर्स्ट, वही, प्ले० २० बी०
c12.s10.8
१४८ वही, प्ले० ३४, ए०
c12.s10.9
१४९ फर्गूसन, वही, प्ले० ८५
c12.s10.10
१५० शिवराममूर्ति, वही, प्ले० ६, १०
c12.s10.11
१५१ वही, प्ले० ६, ११
c12.s10.12
१५२ फर्गूसन, वही, प्ले० ८४, ३
c12.s10.13
१५३ वही, प्ले० ८३, १
c12.s10.14
इस युग में ओढ़नी ओढ़ने का बहुत कम रिवाज था फिर भी अमरावती के एक अर्ध-चित्र में एक स्त्री सिर पर से पीछे की ओर बाल ढंकते हुए ओढ़नी ओढ़े दिखलायी गयी है (आ० २६५)१५४।
c12.s10.15
१५४ वही, प्ले० ७२, १