Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s10.6
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s10.6
- Language
- Hindi
c12.s10.6
इस युग में दक्षिणी स्त्रियां बहुधा अपने सिर नहीं ढांकती थीं पर कभी कभी वे सुसज्जित पगड़ी पहनती थीं । इस तरह की एक भारी भरकम पगड़ी में चक्करदार फेंटे जूड़े के ऊपर बंधे हैं । पगड़ी के आगे एक बदामा शीर्षपट्ट है जिसमें एक झब्बा लटक रहा है (आ० २५९)१४७ । एक दूसरी तरह की पगड़ी में फेंटे एक सींगनुमा केशवेश के चारों ओर बंधे हैं (आ० २६०)१४८ । बाल बांधने की यह प्रथा आज दिन भी मध्यभारत के बनजारा स्त्रियों में पायी जाती है । कभी कभी पट्टीनुमा मुकुट जिसके दोनों ओर दो कुब्बों से झब्बे अथवा बाल की लटें लटकती थीं और जिसके ऊपर दोमुंहे मकर की आकृति अर्धचंद्र वहन करती थी पहना जाता था१४९। एक जगह इस मुकुट में दोहरे मुख वाले मकर का पूरा शरीर बना दिखाया गया है (आ० २६१)१५०। एक जगह चक्करदार मुकुट में एक कलंगी जैसा आभूषण लगा है (आ० २६२)१५१। कभी कभी स्त्रियां छः नोक वाला एक छोटा मुकुट पहनती थीं (आ० २६३)१५२। कभी कभी लहरियादार कमल की पंखुड़ियों से सजा मुकुट पहना जाता था (आ० २६४)१५३ ।