Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s6.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s6.1
- Language
- Hindi
c12.s6.1
विदेशी टोपियां पहनते थे। एक कुलाहनुमा टोपी जिसके पेंदे में चारों ओर गोट लगी रहती थी कभी कभी सिर पर पुलखे तौर से पड़ी रहती थी (आ० १५६)४५। कभी कभी टोपी की चोटी पर फुदने होते थे और वह अर्धचंद्र से भूषित होती थी। यह टोपी एक रूमाल से जिसके दोनों सिरे पीठ पर लहराते थे, सिर के साथ बंधी होती थी (आ० १५७)४६। एक गुंबद के आकार की टोपी जिसके सिरे पर सकरमुद्दीनूमा गांठ (सरकने वाली डेढ़ गांठ) पड़ी होती थी और जिसका किनारा मोतियों से सजा रहता था, पहनी जाती थी (आ० १५८)४७। कटावदार किनारे और गुम्मददार सिरे वाली टोपियां या खोद बहुधा विदेशी सिपाही पहना करते थे (आ० १५९)४८।