Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s8.t2.63
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s8.t2.63
- Language
- Hindi
c12.s8.t2.63
खूब कामदार कंचुक शक अथवा ईरानी स्त्रियां कभी कभी पहनती थीं। मथुरा के पास जमालपुर के टीले से मिले हुए एक वेदिकास्तंभ पर, जो अब लखनऊ म्युजियम में है, धूपदानी लिए हुए दाहिनी ओर जाती हुई एक स्त्री का चित्र है (आ० २१७)१०१। वह लोटे हुए छज्जों वाली एक टोपी और पैर तक पहुंचता एक कंचुक पहने है। कंचुक के बीच में गले से लेकर अंत तक एक पट्टी या गोट है। लेकिन इस कंचुक की सब से खास बात तो उस पर कसीदा किये अथवा बुने हुए अलंकार हैं। पूरा कंचुक का कपड़ा बारह पड़ी पट्टियों में बंधा हुआ है जिनमें शाखें और फुल्ले बने हुए हैं। कोई भी प्रतिकृति इस अलंकार