Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s8.t2.9
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s8.t2.9
- Language
- Hindi
c12.s8.t2.9
मथुरा में मिली एक दूसरे शक राजा की मूर्ति एक कंचुक पहने हैं जिसमें छाती के नीचे तीन इंच चौड़ी दोहरी कामदार गोट घुटनों से होती हुई नीचे चली गयी है। दाहिनी मोहरी में भी ऐसी ही गोट लगी है। पूरे कंचुक में जामदानी मलमल की तरह फुल्ले और दाहिनी मोहरी के सिरे पर तीन इंच व्यास का एक उभरा वृत्त हैं। आधुनिक कोट की तरह कंचुक के दोनों भाग गले के ठीक नीचे जुट कर कुछ नीचे जुटते हैं, पर इस कंचुक और आधुनिक कोट में यह अंतर है कि कंचुक में न तो गला है न लौटन (लेपल्स)। ऐसी अवस्था में गले के स्थान पर एक त्रिभुजाकार कटाव पड़ जाता है जिसमें से हम गले के चारों ओर पतली सिलाई वाला नीचे का वस्त्र देख सकते हैं। बूट आगे ऊपर तक तीन इंच चौड़ी पट्टियों से