Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s9.74
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s9.74
- Language
- Hindi
c12.s9.74
दक्षिण में धातु निर्मित ऊंची ढालदार टोपियां भी इस युग में पहनी जाती थीं। ऐसी टोपी बहुधा रेखाओं और वृत्तों से अलंकृत होती थी और उसमें दोनों ओर झब्बे लगे होते थे (आ० २४५)१३१। एक दूसरी तरह की टोपी मोरपंखों से सजी होती थी और उसमें सामने की ओर एक पान के आकार का अलंकार लगा होता था (आ० २४६)१३२। एक विचित्र तरह की टोपी की शक्ल चायदानी के ढक्कन जैसी है; ढक्कन से चारों ओर अर्धवृत्त निकल रहे हैं (आ० २४७)१३३। यह छोटी टोपी सिर पर ठीक बीचोबीच रक्खी है। एक टोपी में उलटा हुआ कटावदार छज्जा है१३४। दक्षिण में आए हुए विदेशी चिपकी टोपियां