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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s17: चोली

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s17

Language
Hindi

चोली

c13.s17.1

स्त्रियों की चोली के लिए चोल और कूर्पासक शब्द आये हैं११०, पर यह नहीं बतलाया गया है कि इन दोनों में क्या भेद था । चोली अथवा कंचुक के अर्थ में कालिदास ने कूर्पासक शब्द का कई बार व्यवहार किया है१११ । जैसा कि ऋतुसंहार से पता चलता है कूर्पासक एक तरह की चोली थी जो स्तनों पर कस के बैठती थी।

c13.s17.2

११० वही, २, ६, ११८

c13.s17.3

१११ ऋतुसंहार, ४, १६, कूर्पासकं परिदधाति नखक्षतांगी; वही, ५, ८, मनोजकूर्पासक पीडितस्तनाः ।