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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s17.1

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s17.1

Language
Hindi

c13.s17.1

स्त्रियों की चोली के लिए चोल और कूर्पासक शब्द आये हैं११०, पर यह नहीं बतलाया गया है कि इन दोनों में क्या भेद था । चोली अथवा कंचुक के अर्थ में कालिदास ने कूर्पासक शब्द का कई बार व्यवहार किया है१११ । जैसा कि ऋतुसंहार से पता चलता है कूर्पासक एक तरह की चोली थी जो स्तनों पर कस के बैठती थी।