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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s35.3

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s35.3

Language
Hindi

c13.s35.3

१६१ —इस वर्णन में दुपट्टे का स्पष्ट उल्लेख तो नहीं है पर जिस वस्त्र का उल्लेख है उसका वर्णन यह है—सफेणग-वंतरइय-संगय-पल्लंव-वत्थन्ता—अर्थात् वस्त्र के लटकते भाग फेनयुक्त लहरियों की तरह घूमते थे और उसकी काट नाटयानुरूप थी। टीकाकार ने संगय की व्याख्या नाटयविची उपपन्ना की है । इस वर्णन के आशय से यह पता लगता है कि यह वस्त्र दुपट्टे अथवा एप्रन की तरह रहा होगा । नृत्य में गति दिखलाने के लिए दुपट्टा पहना जाता था ।