Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s44: बौद्ध भिक्षुओं के वस्त्रों के नाम
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s44
- Language
- Hindi
बौद्ध भिक्षुओं के वस्त्रों के नाम
c13.s44.1
ताकाकुसु द्वारा इत्सिंग की यात्रा विवरण के उस भाग का अनुवाद, जहां भिक्षुओं के वस्त्र पहनने की विधि दी गयी है, ठीक तरह से समझ में नहीं आता । संघाटी चार हाथ चौड़ी होती थी जिसमें गले से पांच अंगुल हट कर एक चार अंगुल चौखूटा कपड़ा जोड़
c13.s44.2
दिया जाता था। इसके बीच में एक छेद होता था जिसके बीच से रेशमी अथवा सूती फीते बाहर निकाल कर छाती पर बांध दिये जाते थे२३१। उपवसन में भी इसलिए फीते लगे रहते थे कि वह जरा ऊपर खींच कर बांधा जा सके२३२। एकहरा अथवा दोहरा निवसन पांच हाथ लंबा और दो हाथ चौड़ा होता था और वह नाभि को ढकते हुए पहना जाता था। इसके दोनों छोरों में तीन गांठें लगा दी जाती थीं और वे पीछे इस तरह खोंस ली जाती थीं कि वे आंखों से छिपी रहें। निवसन के ऊपर कमरबंद भी पहना जाता था२३३।
c13.s44.3
२३१ वही, पृ० ७२-७३
c13.s44.4
२३२ वही, पृ० ७३
c13.s44.5
२३३ वही, पृ० ७५-७६