Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s8.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s8.1
- Language
- Hindi
c13.s8.1
१—उद्गा—ऊदबिलाव के चमड़े के बने रुमाल। आचारांग६३ की टीका के अनुसार उद्ग 'सिंधुविषयमत्स्याः तत्सूक्ष्मचर्मनिष्पन्नानि' अर्थात् यह वस्त्र सिंध में ऊद बिलाव के चमड़े से बनता था। निशीथ में६४ इसकी व्याख्या है 'सुसुणागिती जलचरासत्ता तेसिं अजिणा उद्दा, अण्णे भणंति उददे चम्मं गोरमिगाणं अजिणा' अर्थात् जल में रहने वाली सुंस का चमड़ा, दूसरे कहते हैं कि उद्ग किसी सफेद पशु का चमड़ा होता था। समुद्री ऊद-बिलाव का चमड़ा तो बहुत महीन और पतला होता है। हो सकता है कि प्राचीन काल में इन समुद्री ऊदों के चमड़ों से ओढ़ने बनाये जाते रहे हों।