Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s8.13
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s8.13
- Language
- Hindi
c13.s8.13
६—कणगाणि—सुनहरे काम की चादर७०। निशीथ में७१ इसके दो अर्थ दिये गए हैं, 'वरडगपारिगादिपावरगा ते सुवण्णे, सुवण्णे दुते सुत्तं रज्जति तेन जं वूतं कणगम्' अर्थात् वट इत्यादि की छाल के रेशे से बनी चादर सुवर्ण कहलाती थी, अथवा सुवर्ण की