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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s8.16

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s8.16

Language
Hindi

c13.s8.16

द्रुति (घोल) में रंग कर जिस सूत से कपड़ा बुना जाय उसे सुवर्ण कहते हैं। सुवर्ण की आखीरी व्याख्या बड़े काम की है क्योंकि इसमें सोने के घोल में रंग कर कलाबत्तू बनाने की क्रिया की ओर संकेत है। जहां तक हमें पता है मुगल युग में विटाई से कलाबत्तू बनता था, अर्थात् चांदी सोना मिला कर तारकश तार खींचते थे । बेटरी की सहायता से कलाबत्तू रंगने की क्रिया तो फ्रांस से इस देश में हाल ही में आयी । लेकिन इस उल्लेख से तो यह सिद्ध होता है कि सोने के घोल में कलाबत्तू रंगने की प्रक्रिया गुप्त युग में भी लोग जानते थे । सोने की द्रुति बनाने की क्रिया वैद्यक शास्त्रों में दी हुई है पर अब वह काम में नहीं आती ।