Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s8.4
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s8.4
- Language
- Hindi
c13.s8.4
२—पेस—आचारांग६५ में पेस की व्याख्या है 'पेसाणीत्ति सिंधुविषय एवं सूक्ष्म चर्माणः पशवस्तच्चर्म निष्पन्नानीति', अर्थात् सिंधु देश के एक पशु विशेष महीन चमड़े से बना हुआ। निशीथ६६ में इसके अर्थ है 'पसवांतेसिं अइण्णं, अण्णे भणंति पेसा लेसा य मच्छाइयाए', अर्थात् पशु का चमड़ा, दूसरों के अनुसार पेसा मछलियों का चमड़ा था। इन व्याख्याओं से तो यह सिद्ध होता है कि पेस किसी पशु विशेष का चमड़ा था, लेकिन वैदिक और बौद्ध साहित्य में पेस सदा कसीदे के काम के लिए आया है। यहां पर भी सुंदर कसीदे के काम से बने शाल से ही मतलब है कि जिसका ज्ञान टीकाकारों को न था।