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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s12: घुड़सवारों की वेश-भूषा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s12

Language
Hindi

घुड़सवारों की वेश-भूषा

c14.s12.1

अजंटा की नं० १ लेण में एक घुड़सवार एक योगी से बातचीत करता हुआ बताया गया है (आ० ३११)[^५३। इसका पूरा बांहों वाला कंचुक काली बुंदकियों से सजा है। ये काली बुंदकियां हमें अगरुपंक से लिप्त वाणभट्ट द्वारा वर्णित कंचुक की याद दिलाती है[^५४। दुपट्टे के सिरे पीछे फड़क रहे हैं और बाल एक फीते से बंधे हैं ।

c14.s12.2

५३ हेरिंगम, वही, प्ले० ६, ८

c14.s12.3

५४ हर्षचरित, पृ० १६

c14.s12.4

अजंटा के सिंहल-युद्ध नामक चित्र में घुड़सवार आधी बाहों वाले कूर्पासक और जांघिया पहने हैं । इस कूर्पासक के गले और मुहरियों पर गोटें लगी मालूम पड़ती हैं (आ० ३१२)[^५५।

c14.s12.5

५५ हेरिंगम, प्ले० १७, १९

c14.s12.6

१७ नंबर की लेण के एक भित्ति-चित्र में दो घुड़सवार नुकीले गले वाले कंचुक पहरे दिखलाये गये हैं । गले पर छाया से पता लगता है कि शायद वह समूर का बना होगा । बायें ओर के अश्वारोही की टोपी का ऊपर मुड़ा छज्जा कटावदार है तथा उसके चोटी पर एक

c14.s12.7

३०४

c14.s12.8

३०५

c14.s12.9

३०६

c14.s12.10

३०७

c14.s12.20

फूंदना है । अपनी वेश-भूषा और आकृति से ये अश्वारोही ईरानी अथवा हूण विदित होते हैं (आ० ३१३)५६।

c14.s12.21

५६ वही, प्ले० २२, २४

c14.s12.22

१७ नं० की लेण के एक दूसरे भित्ति-चित्र में आगे के दो घुड़सवारों में बायीं ओर का घुड़सवार पूरी बांहों वाला आगे से खुला कोट (वारबाण) पहने है । उसका साथी चाकदार कंचुक, पाजामा और पूरा बूट पहने है । इसके एक वस्त्र का जिसका कोना बाहर निकला है, क्या रूप था ठीक ठीक नहीं कहा जा सकता (आ० ३१४)५७।

c14.s12.23

५७ वही, प्ले० ८, १०

c14.s12.24

१७ नंबर की लेण के मातृपोषक जातक वाले भित्ति-चित्र में बायीं ओर एक घुड़सवार एक बहुत चौड़े कालर वाला हलके नीले रंग का पूरे बांह का कंचुक पहरे है । उसका फेंटा कसा हुआ और पैरों में बूट हैं (आ० ३१५)५८।

c14.s12.25

५८ प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम में प्रतिकृति

c14.s12.26

बाग के एक भित्ति-चित्र में सत्रह घुड़सवारों का एक समूह तरह तरह के कंचुक पहरे हैं (आ० ३१६)५९। घुड़सवारों का सरदार नीली बूंदकीदार पीला कंचुक पहने है, इसके दाहिने ओर एक दूसरा सवार फूलदार चारखाने का कंचुक पहने है । यह कहना कठिन है कि चारखानों का मतलब सकरपारेदार सीयनों से है अथवा अलंकार से । अगर इसका मतलब सीयन से है तो इस वस्त्र से शायद वारबाण का तात्पर्य हो सकता है । सरदार के बायें ओर दूसरा सवार एक गेरुए रंग का कोट और नीले रंग के सूक्ष्म अलंकारों से सज्जित पीली टोपी पहने है । आगे के तीन सवारों में एक सवार के कंचुक में रूढ़िगत पक्षियों जैसे अलंकार हैं । घुड़सवारों के तीसरी पंक्ति के चार सवारों में एक सवार कोणाकार गले वाला कंचुक और पाजामा पहरे है और इसका साथी चूंदरी का बना कंचुक (पुलकबंध) पहने है । पीछे के चार सवारों में एक सवार पूरी बांह का वारबाण पहने है । सवारों के सिर प्रायः नक्काशीदार रंगीन रुमालों से ढंके हैं । यह चित्र हमें बाणभट्ट द्वारा वर्णित श्रीहर्ष के घुड़सवारों की याद दिलाता है६०।

c14.s12.27

५९ मार्शल, वही, प्ले० एफ०

c14.s12.28

६० हर्षचरित, पृ० २०२

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