Pramāṇa · Search · About · API

Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s12.26

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s12.26

Language
Hindi

c14.s12.26

बाग के एक भित्ति-चित्र में सत्रह घुड़सवारों का एक समूह तरह तरह के कंचुक पहरे हैं (आ० ३१६)५९। घुड़सवारों का सरदार नीली बूंदकीदार पीला कंचुक पहने है, इसके दाहिने ओर एक दूसरा सवार फूलदार चारखाने का कंचुक पहने है । यह कहना कठिन है कि चारखानों का मतलब सकरपारेदार सीयनों से है अथवा अलंकार से । अगर इसका मतलब सीयन से है तो इस वस्त्र से शायद वारबाण का तात्पर्य हो सकता है । सरदार के बायें ओर दूसरा सवार एक गेरुए रंग का कोट और नीले रंग के सूक्ष्म अलंकारों से सज्जित पीली टोपी पहने है । आगे के तीन सवारों में एक सवार के कंचुक में रूढ़िगत पक्षियों जैसे अलंकार हैं । घुड़सवारों के तीसरी पंक्ति के चार सवारों में एक सवार कोणाकार गले वाला कंचुक और पाजामा पहरे है और इसका साथी चूंदरी का बना कंचुक (पुलकबंध) पहने है । पीछे के चार सवारों में एक सवार पूरी बांह का वारबाण पहने है । सवारों के सिर प्रायः नक्काशीदार रंगीन रुमालों से ढंके हैं । यह चित्र हमें बाणभट्ट द्वारा वर्णित श्रीहर्ष के घुड़सवारों की याद दिलाता है६०।