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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s2: सिपाहियों की वेश-भूषा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s2

Language
Hindi

सिपाहियों की वेश-भूषा

c14.s2.1

युद्ध यात्रा पर निकले सिपाही अपनी धोती का अगला हिस्सा मोड़ कर कमर में खोंस लेते थे, जिससे चलने में धोती लपटे नहीं । धोती के बंधन में मजबूती लाने के लिए कमरबंद भी पहनते थे (आ० २७४)४ । इस कमरबंद के सिरे नाभि के नीचे लगी दो चूड़ियों के बीच से निकाल दिये जाते थे । अक्सर उनकी धोती घुटनों तक ही पहुंचती थी (आ० २७५)५ । सिपाही पगड़ी भरी बांह के कंचुक और धोती भी पहनते थे (आ० २७६)६ ।

c14.s2.2

२ वही, प्ले० ६, ६

c14.s2.3

४ वही, प्ले० ५, बी०

c14.s2.4

५ वही, प्ले० ४, ६

c14.s2.5

६ वही, प्ले० ४

c14.s2.6

एक जगह भगवान बुद्ध की पूजा करते हुए एक भक्त की पीठ दिखलाई गयी है जिससे

c14.s2.7

पता लगता है कि लोग लांग खोंसते थे । शीर्षपट्ट को यथास्थान स्थिर रखने के लिए पगड़ी के पीछे एक चौपतिया कोंढ़ा भी लगा दिखलाया गया है (आ० २७७)७ ।

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