Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s5: स्त्रियों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s5
- Language
- Hindi
स्त्रियों की वेश-भूषा
c14.s5.1
स्त्रियां पतली साड़ी पहने दिखलायी गयी हैं । एक जगह एक विदेशी स्त्री टोपी पहने दिखलायी गयी है (आ० २८०)१० ।
c14.s5.2
८ वही, प्ले० ४, एफ
c14.s5.3
१० वही, प्ले० ३, जी
c14.s5.4
२
c14.s5.5
गुप्त-युग की वेश-भूषा के जिन अंगों पर साहित्य से कम प्रकाश पड़ता है, उनका पुरातत्व से समाधान हो जाता है । इस युग की मूर्ति-कला अमरावती के अर्ध चित्रों की तरह हमें तात्कालिक सामाजिक जीवन के चित्र नहीं देती और इसका कारण इस युग की कला के उद्देश्य में परिवर्तन है, जिसमें अनुप्राणित हो कर वह अध्यात्मचिंतन की ओर उन्मुख हो जाती है । इससे उसमें वर्णनात्मकता की तो कमी हो जाती है, पर रसभावना कहीं अधिक बढ़ जाती है । पर भाग्यवश यह चिंतनशीलता मूर्तियों तक ही सीमित रही। इस युग के भारतीय चित्रकार तो अपने पुरानों की तरह चित्रों को तत्कालीन समाज और संस्कृति के प्रतिबिंब मानते रहे। अजंटा के भित्ति-चित्र गुप्त-युग के वस्त्रों के लिए कोश के समान हैं । नक्कांशियां इन वस्त्रों पर कम मिलती हैं । चित्रों में सादे और सिले वस्त्र दोनों आते हैं ।
c14.s5.6
गुप्त-युग के सिक्के भी हमें तत्कालीन राजकीय वेश-भूषा के बारे में काफी मसाला देते हैं । इनमें अंकित राजाओं की छोटी शबीहों में भी वेश-भूषा का आकर्षक चित्रण हुआ है ।