Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s8.t3: कुमारगुप्त प्रथम
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s8.t3
- Language
- Hindi
कुमारगुप्त प्रथम
c14.s8.t3.1
कुमारगुप्त प्रथम के राज्यकाल में जब गुप्त-साम्राज्य अपनी चोटी पर पहुंच चुका था, हम उस जातीय पहरावे की चलन देखते हैं जिसमें से कुषाण युग के पाजामे और पूरे बूट निकाल दिये गये थे। साधारणतः कुमारगुप्त प्रथम चाकदार कंचुक और घुटनों तक की धोती पहने दिखलाये गये हैं (आ० २९३)२७। कभी कभी यह धोती एड़ी तक पहुंचती थी२८। पगड़ी की जगह चूर्ण कुंतल देख पड़ते हैं। कमरबंद का फंदा बायीं ओर होता है और उसके सिरे उसी ओर लटका करते थे२९।
c14.s8.t3.2
२७ वही, प्ले० १०, ९
c14.s8.t3.3
२८ वही, प्ले० ११, ११
c14.s8.t3.4
२९ वही, प्ले० १२, ४
c14.s8.t3.5
कुमारगुप्त के चांदी के सिक्कों में वेश-भूषा की दृष्टि से आकर्षक वस्तु चपकी
c14.s8.t3.6
टोपी३० अथवा सजी पगड़ी३१ है जिसका छज्जा ऊपर मुड़ा है (आ० २९४)३२।
c14.s8.t3.7
३० वही, प्ले० १२, ८
c14.s8.t3.8
३१ वही, प्ले० १५, ६
c14.s8.t3.9
३२ वही, प्ले० १६, ५