Pracin Bharatiya Veshabhusha c5.s3.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c5.s3.1
- Language
- Hindi
c5.s3.1
मट्टी की मूर्तियों में स्त्रियों के जो भी वस्त्र आते हैं वे काफी साधारण हैं। अगर गहने बाद कर दिये जावें तो स्त्रियों के धड़ नंगे दीखते हैं । संकरी साड़ी घुटने के बहुत ऊपर पहुंचती हैं; इसे साड़ी न कह कर लंगोटी कहना बेहतर होगा। जंतरों पर बनी स्त्री मूर्तियां भी ऐसी ही लंगोटी पहने हैं। लेकिन इस लंगोटी का आगा पीछा के बनिस्बत काफी छोटा होता है। लंगोटी को कमर से बांधने के लिए मेखला पहनी जाती थी। यह मेखला कई लड़ मनकों या सादे कपड़े की, जिसके छोर मिलाने के लिए एक चपकन होती थी, बनी होती थी। एक जगह मेखला किसी बुने कपड़े के फूंदने से बंधी दिखलायी देती है । कहीं कहीं लंगोटी किसी गुलिका (boss) जैसे आभरण से भूषित दिखलायी गयी है११। एक मट्टी की मूर्ति में एक स्त्री घोघी (cloak) पहने दिखलायी गयी है । इस घोघी ने स्त्री के हाथ छिपा रखे हैं, और वह लंगोटी के छोर के नीचे नहीं पहुंचती (आ० ७) । डा० मेके का अनुमान है कि शरीर रक्षा के अतिरिक्त साधन के रूप में इसका व्यवहार हुआ है१२ ।