Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s21: उष्णीष या पगड़ी
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s21
- Language
- Hindi
उष्णीष या पगड़ी
c6.s21.1
उष्णीष शब्द का पगड़ी के अर्थ में प्रयोग सब से पहले अथर्ववेद१०२ और पञ्चविंश
c6.s21.2
१०२ अ० वे०, १५।२।१
c6.s21.3
ब्राह्मण के१०३ व्रात्य प्रकरण में आया है। ऐतरेय१०४ और शतपथ में१०५ इस शब्द का प्रयोग राजाओं और व्रात्यों के पहरावों के संबंध में आया है। राजे वाजपेय१०६ और राजसूय१०७ के अवसरों पर उष्णीष धारण करते थे। इन्द्राणी सम्राज्ञी की हैसियत से उष्णीष पहनती थी१०८। व्रात्यों का उष्णीष सफेद होता था। सूत्रों के अनुसार उष्णीष में कई फेंटे होते थे, और वह जरा एक तरफ झुका कर बांधा जाता था१०९। यज्ञ के अवसर पर उष्णीष के दोनों छोर आगे लाकर उसकी तहों में खोंस दिये जाते थे११०। लगता है राजाओं के उष्णीष के छोर बाहर लटके रहते थे।
c6.s21.4
१०३ पं० ब्रा०, १७।१।१४
c6.s21.5
१०४ ऐतरेय ब्रा०, ६।१
c6.s21.6
१०५ श० ब्रा०, ३।३।२।३
c6.s21.7
१०६ श० ब्रा०, ५।३।५।२३
c6.s21.8
१०७ मैत्रायणी सं०, ४।४।३
c6.s21.9
१०८ श० ब्रा०, ५।३।५।२३
c6.s21.10
१०९ कात्यायन श्रौ० सू०, २२।४
c6.s21.11
११० श० ब्रा०, ३।५।२० इत्यादि
Cites (6)
- Śatapathabrāhmaṇa — Yājñavalkya & Śāṇḍilya (Vedic teacher), Sanskrit
- Kātyāyanaśrautasūtra — Kātyāyana (Vājasaneyi sūtrakāra), Sanskrit
- Kṛṣṇayajurvedasaṃhitā — Sanskrit
- Pañcaviṃśabrāhmaṇa — Sanskrit
- Aitareyabrāhmaṇa — Mahidāsa Aitareya, Sanskrit
- Atharvavedasaṃhitā — Atharvan & Aṅgiras, Sanskrit