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Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s21.3

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s21.3

Language
Hindi

c6.s21.3

ब्राह्मण के१०३ व्रात्य प्रकरण में आया है। ऐतरेय१०४ और शतपथ में१०५ इस शब्द का प्रयोग राजाओं और व्रात्यों के पहरावों के संबंध में आया है। राजे वाजपेय१०६ और राजसूय१०७ के अवसरों पर उष्णीष धारण करते थे। इन्द्राणी सम्राज्ञी की हैसियत से उष्णीष पहनती थी१०८। व्रात्यों का उष्णीष सफेद होता था। सूत्रों के अनुसार उष्णीष में कई फेंटे होते थे, और वह जरा एक तरफ झुका कर बांधा जाता था१०९। यज्ञ के अवसर पर उष्णीष के दोनों छोर आगे लाकर उसकी तहों में खोंस दिये जाते थे११०। लगता है राजाओं के उष्णीष के छोर बाहर लटके रहते थे।