Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s22.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s22.1
- Language
- Hindi
c6.s22.1
प्राचीन संहिताओं में जूतों का कहीं उल्लेख नहीं आता। ऋग्वेद में आये बटूरिणापाद१११ से शायद लड़ाई में पैरों की रक्षा के लिए किसी आवरण से मतलब हो। पत्-संगिनी११२ का मतलब डा० सरकार के अनुसार११३ पैर में बांधी जाने वाली पट्टी से है जिसका व्यवहार पैदल सिपाही करते थे। उपानह् का सर्वप्रथम उल्लेख यजुर्वेद११४ अथर्ववेद११५ और ब्राह्मणों में११६ आया है। व्रात्य इसका व्यवहार करते थे११७। यज्ञ के अवसर पर पहनने के जूते सूअर के चमड़े से बनते थे११८।