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Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s23: यज्ञ के अवसर पर नये कपड़े पहनने की प्रथा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s23

Language
Hindi

यज्ञ के अवसर पर नये कपड़े पहनने की प्रथा

c6.s23.1

यज्ञ के अवसर पर नये वस्त्र धारण करने की प्रथा थी। शतपथ के अनुसार११९ यह

c6.s23.2

११९ श० ब्रा०, ३।१।२।१९

c6.s23.3

वस्त्र शुद्ध गिना जाता था । यज्ञ का वस्त्र बिना कुंदी किया हुआ (आहत) होता था । प्रतिप्रस्थातृ इसलिए इसे अच्छी तरह पीटता था कि स्त्रियों द्वारा कातने (आकृणत्ति) और बुनने (वयति) में जो दोष वस्त्र में आ गये हों वे इस क्रिया से निकल जायं और वस्त्र यज्ञ के लिए शुद्ध हो जाय ।

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