Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s23.3
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s23.3
- Language
- Hindi
c6.s23.3
वस्त्र शुद्ध गिना जाता था । यज्ञ का वस्त्र बिना कुंदी किया हुआ (आहत) होता था । प्रतिप्रस्थातृ इसलिए इसे अच्छी तरह पीटता था कि स्त्रियों द्वारा कातने (आकृणत्ति) और बुनने (वयति) में जो दोष वस्त्र में आ गये हों वे इस क्रिया से निकल जायं और वस्त्र यज्ञ के लिए शुद्ध हो जाय ।