Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s25.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s25.1
- Language
- Hindi
c6.s25.1
यज्ञ विधि में जो सोम के कपड़ों का वर्णन शतपथ१२२ में आया है। वही पहरावा तत्कालीन भारतीय राजाओं का था। पूरी पोशाक में उपनहन (शायद धोती की तरह कोई कपड़ा अथवा जूता), पर्याणहन (चादर) और पगड़ी (उष्णीष) होते थे। पगड़ी न होने पर दो तीन अंगुल चौड़ी पट्टी से भी काम चल जा सकता था । राजसूय यज्ञ के समय तार्प्य पहनने के बाद राजा एक सफेद ऊनी कपड़ा (पाण्ड्वं) पहनता था। इसके वह एक चादर (अधिवास) से अपने को ढकता था और इसके बाद उष्णीष के छोर सामने की तह में खोंस लेता था ।१२३ उष्णीष ठीक ठीक कैसे बांधा जाता था इसके संबंध में टीकाकारों का एक मत नहीं है। एगलिंग१२४ का अनुमान है कि सिर पर पगड़ी की एक लपेट बांधी जाती थी और उसके दोनों