Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s25.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s25.5
- Language
- Hindi
c6.s25.5
छोर कंधों पर यज्ञोपवीत की तरह लटकते रहते थे और बाद में वे नाभि के पास शायद धोती में खोंस लिये जाते थे । इस यज्ञ में वस्त्र पहिनने की क्रिया लाक्षणिक रीति से गर्भ के आवरणों और प्रजनन की क्रियाओं के अभिव्यंजना के रूप में थी।१२५ कुछ यज्ञों में नीवि की चुन्नट खोल दी जाती थी१२६ (नीविमुद्वृष्य) । ऐसा क्यों किया जाता था यह तो ठीक ठीक नहीं कहा जा सकता पर इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि नीवि में चूनन डालने की प्रथा थी।