Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s28.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s28.1
- Language
- Hindi
c6.s28.1
वाजपेय यज्ञ के अवसर पर१३० यजमान की पत्नी को कमर में लपेटे हुए दीक्षित वस्त्र के ऊपर कुश का बना हुआ चंडातक पहनना लाजमी था । यहां चंडातक और कुश के अर्थ जानने जरूरी हैं । सायण के अनुसार कुश शब्द कुश अथवा रेशम का द्योतक है और चंडातक रेशमी होता था (क्रिमिकोशविकारभूतवासः) । अगर कुश का अर्थ रेशमी वस्त्र ठीक है तो ई० पू० ७ वीं या ८ वीं शताब्दी में भी इस देश में रेशम का व्यवहार प्रचलित हो चुका था । ऐसा होना कुछ असंभव भी नहीं है क्योंकि पाणिनि के समय (ई० पू० ५ वीं शताब्दी) में तो रेशम चल चुका था । चंडातक और चलन एक ही होते थे । चंडातक को अर्धोरुक भी कहा गया है जो आधी जांघों तक आने वाला घांघरा जैसा कोई वस्त्र था और जिसे नर्तकियां पहना करती थीं। लगता है कि अर्धोरुक जांधिया या घघरी की तरह कोई वस्त्र था । इसका उल्लेख भी इस बात का प्रमाण है कि वैदिक युग में सिले हुए वस्त्रों का व्यवहार होता था ।