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Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s5.5

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s5.5

Language
Hindi

c6.s5.5

दक्षिणा के रूप में दिया जाता था। लाट्यायन श्रौत सूत्र के टीकाकार को इस शब्द का ठीक ठीक अर्थ का पता नहीं था और इसीलिए उसने वरासी को क्षौम्य अर्थात् अतसी की छाल के रेशे का बना वस्त्र कहा है। आश्वलायन श्रौत सूत्र के टीकाकार ने बरासी का अर्थ मोटे सूत का कपड़ा किया है। डा० सरकार के मत से उत्तर पश्चिमी सीमा प्रांत और हिमालय के बहिर्गिरि पर उगने वाले वरस (एक प्रकार के लाल फूल वाला रोडोडेंड्रन) नाम के वृक्ष की छाल के रेशे से शायद यह वस्त्र बुना जाता था२५।