Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s14: जैन साधुओं के वस्त्र
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s14
- Language
- Hindi
जैन साधुओं के वस्त्र
c7.s14.1
आचारांग सूत्र९८ के अनुसार जैन साधु केवल तीन वस्त्र ग्रहण कर सकते थे, इनमें दो तो क्षौम की धोतियां (क्षौम कल्प) होती थीं और एक ऊनी चादर (और्णिक कल्प) । शीलांक अपनी टीका९९ में कहते हैं कि जाड़ों में जैन साधु ढाई हाथ वर्ग गज की दो कोपीनें और एक ऊनी वस्त्र ग्रहण कर सकते थे। जिस अवस्था में कपड़े साधुओं को मिलते थे उसी
c7.s14.2
९८ आ० सू०, १।७।४।१
c7.s14.3
९९ टीका, पृ० २५१ अ
c7.s14.4
अवस्था में वे उन्हें पहन सकते थे। जैन साधु अपने कपड़े धो, रंग नहीं सकते थे। जाड़ा बीत जाने पर साधु सोमसाटी भी पहन सकते थे१००। जिनकल्पधारी साधू हमेशा नंगे रहते थे।
c7.s14.5
१०० आचारांग सूत्र, १।७।५।१
Linked texts (4)
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