Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s5.2
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s5.2
- Language
- Hindi
c7.s5.2
वस्त्रों के लिए हुआ है। महावग्ग२७ में भी कंबल शब्द का व्यवहार ऊनी वस्त्रों के लिए ही हुआ है। जातकों में२८ गंधार के रक्त पांडु कंबल (इंदगोपक वण्णाभा गंधारा पंडुकंबला) की तारीफ की गयी है। महावाणिज जातक२९ में बहुमूल्य वस्तुओं की तालिका में उड्डीयान के कंबल भी शामिल हैं। शिवि लोगों का देश ऊनी शालों के लिए, जिन्हें बौद्ध साहित्य में सीवेय्यक दुस्स३० कहा है, प्रसिद्ध था। सिवि जातक३१ में इसका उल्लेख है कि कोशल राज ने दशबल नाम के एक व्यक्ति को सिवि देश का वस्त्र (सीवेय्यक वत्थं) जिसका दाम एक लाख कार्षापण था, उपहार में दिया। दुस्स शब्द अब भी पंजाबी और हिन्दी में धुस्सा के रूप में चला आता है लेकिन धुस्से की चादर मामूली कीमत की होती है। लगता है कि प्राचीन दुस्स दुशाले की तरह कोई कीमती ऊनी चादर थी। दुस्स प्राचीन वैदिक तूष जिसके अर्थ कपड़े में बटी या अनबटी छीर है, निकला है। दुशाले में बराबर छीर छोड़ी जाती है इसलिए उसका नाम महाजनपद युग में दुस्स पड़ा।