Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s5.8
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s5.8
- Language
- Hindi
c7.s5.8
रामायण और महाभारत के अध्ययन से भी ऐसा पता चलता है कि गंधार और पंजाब ऊनी वस्त्रों के लिये प्रसिद्ध थे। रामायण में कहा गया है कि कैकय देश (आधुनिक शाहपुर-झेलम) के राजा ने अपने भांजे भरत को विदाई में उपहार स्वरूप अलंकृत कालीन (चित्रांकंबलान्) शुभ्र कंबल और बकरों की खालें दीं३२। महाभारत के सभापर्व के उन अध्यायों से जिनमें राजसूय यज्ञ के अवसर पर देश के विभिन्न भागों से आये उपायनों का वर्णन है यह पता चलता है कि पंजाब, उत्तर पश्चिमी सीमाप्रान्त और पूर्वी अफगानिस्तान से ऊनी कपड़े और अधिकतर शालें आयीं। कंबोज (आधुनिक ताजिकिस्तान) से कदली मृग की खालें, कीमती कंबल, ३३भेड़ों की खालें (ऐडान्वैलान्) और वृषदंश पशु के समूर और बकरों की खालें आयीं३४। परिसिधु३५ प्रदेश से भी तरह तरह के कंबल आये। चीनियों हूणों, शकों, ओड्रों और पर्वतांतर में रहने वाले कबीलों ने भी तरह तरह के ऊनी वस्त्र उपहार में