Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s14.1
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s14.1
- Language
- Hindi
c8.s14.1
उपरोक्त देशों से उपायानरूप में नमदे (कुट्टीकृत)७९, कमल के रंग के हजारो ऊनी कपड़े, मुलायम रेशमी कपड़े तथा मेमनों की खालें भी आयीं। आज दिन भी पूर्वी अफगानिस्तान की मेमनों की खालें मशहूर हैं। चीनी चमड़े और समूरों की ख्याति ईसा की पहिली शताब्दी तक थी। पेरिप्लस८० के अनुसार सिंध नदीपर बार्बरिकन नाम के बंदरगाह से चीनी चमड़े और समूर बाहर भेजे जाते थे। प्लिनी८१ के अनुसार चीन के रंगीन चमड़े काफी कीमती होते थे ओर आराइश के काम में इनका काफी उपयोग होता था। कंबलों का रंग कमल जैसा कहने से प्रतीत होता है कि लेखक का संकेत शायद ऊपरी स्वात के बने कंबलों से है। महावणिज-जातक में८२ उड्डीयान के बने कंबल काफी कीमती माने गये है। आज दिन भी तोरवाल में ठोक कर बिने चटक रंग कंबल सीमाप्रान्त और पंजाब में स्वाती कंबल नाम से मशहूर हैं८३