Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s2.7
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s2.7
- Language
- Hindi
c8.s2.7
१३ वही, प्रोफेसर नीलकंठ शास्त्री ने चीन और भारत के प्राचीनतम संबंध के उद्धरणों को इसलिए भली भांति जांचा है क्योंकि इस जांच पड़ताल से अर्थशास्त्र के, जिसमें चीन का उल्लेख है, समय पर काफी प्रकाश पड़ता है, नीलकंठ शास्त्री, आई० एच० क्यू (१४), १६३८ (पृ० ३८० इत्यादि)। प्रो पलियो प्राचीन चीनी सबूतों के आधार पर (बी० ई० एफ० ई० ओ०, ४, पृ० १४६) इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि चीन नाम प्रथम त्सिन राजवंश से (ई० पू० २४६-२०७) निकला। अर्थशास्त्र के छपने पर विद्वानों में काफी बहस चली और जो विद्वान अर्थशास्त्र को मौर्य काल के बाद रखने के पक्ष में थे उन्होंने अपने मत के पक्ष में चीनपट्ट का उल्लेख किया है। याकोबी और लाउफर इस सिद्धान्त को नहीं मानते। प्रो० शास्त्री ने कुछ चीनी प्रमाण दे कर यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि कम से कम ई० पू० दूसरी शताब्दी में चीन और भारत में संबंध था।
Linked texts (2)
- Mahābhārata — Vyāsa, Sanskrit
- Kauṭilīya Arthaśāstra — Kauṭilya, Sanskrit