History of Technology in India, Vol. I: From Antiquity to c. 1200 A.D. v1.c13.22
History of Technology in India, Vol. I: From Antiquity to c. 1200 A.D. v1.c13.22
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- English
v1.c13.22
कमार यानि लोहार लकड़ी के टुकड़े लोहे की खनिज के साथ रखता है । तालपत्र में लकड़ी के टुकड़े रखते होंगे । लोहे के खनिज के टुकड़े और तालपत्र लकड़ी के टुकड़े अर्क (asclepias giganta) यानि आकन्द वृक्ष के पत्तों से (पर्णीभिः) ढकते थे । खनिज के पत्थर (धुभिः अश्मभिः) लकड़ी के टुकड़े के साथ तपाने से जली हुई लकड़ी का कोयला (कार्बन) लोहे के साथ घुलता होगा जिससे लोहे का इस्पात में परिवर्तन होता होगा । कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिह शकुन यानि हंस पंछी के पर भी डालते थे । हंस के पंख में 90% वाष्पील द्रव्य और 10% कार्बन होता है या शकुन पंछी के परों का धौंकनी निर्माण करने के लिए उपयोग करते होंगे । ऋग्वेदकाल में इस्पात बहुत महंगा होता था । इसीलिए यह लोहार धन-सम्पन्न (हिरण्यवन्तं) व्यक्ति की प्रतिक्षा करता था ताकि उन्हें यह इस्पात बेच सके । इसी लेख में आगे बताया गया है कि उन्नीसवीं सदी तक भारतीय ऋग्वेद दिए हुए इस ऋचा में वर्णित पद्धति से इस्पात निर्मित करते थे ।
Linked texts (1)
- Ṛgvedasaṃhitā — Sanskrit