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Vada in Theory and Practice: Studies in Debates, Dialogues and Discussions in Indian Intellectual Discourses c11.s18.109

Vāda in Theory and Practice: Studies in Debates, Dialogues and Discussions in Indian Intellectual Discourses c11.s18.109

Language
English

c11.s18.109

⁸⁸जैसे परमात्मा ने प◌ृथिवी, जल, अग्नि, वायु, चन्द्र, सूर्य और अन्नादि पदार्थ सबके लिए बनाए हैं, वैसे ही वेद भी सबके लिए प्रकाशित किए हैं, और जहाँ-जहाँ निषेध किया है उसका अभिप्राय यह है कि जिसको पढ़ने-पढ़◌ाने से कुछ भी न आवे, वह निर्बुद्धि और मूर्ख होने से शूद्र कहाता है। उसका पढ़ना-पढ़◌ाना व्यर्थ है। और जो स्त्रियों को पढ़ने का निषेध करते हों, वह तुम्हारी मूर्खता, स्वार्थता और निर्बुद्धिता का प्रभाव है। देखो! वेद में कन्याओं के पढ़ने का कारण