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Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.7

Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v1.c62.7

Language
English

v1.c62.7

| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| भित्तिस्तम्भवयविधौ विशंतिश्चयगुणास्तद्विपरीताः दोषाश्चापि विशतिः | १७० | सभा | १८८ |
| | | अश्वशाला | १८८-१८९ |
| कुड्यचयनप्रकारः | ,, | गज-शाला | १८९ |
| कुड्यचयनदोषाः | १७०-१७१ | **राज-निवेशे प्रमुख-निवेशानां लक्षणम्** | |
| **सवन-भूषायां—** | | न्यायशाला | १९६-१६० |
| प्रयोज्याप्रयोज्यानि | १७१--१७४ | पौरा देशा च सभा | १६१ |
| अ, अप्रयोज्यानि | १७२-१७२ | भाण्डागारम् | १९१-१९२ |
| ब, प्रयोज्यानि | १७२—१७४ | आयुधागारम् | १९२-१९३ |
| **भवन-दोषेषु—द्वारगुणदोषाः** | | पुस्तक-शाला | १९३-१९४ |
| | | बसन्तगृहम् | १९४ |
| निवेक्षाः | १७४-१७५ | **द्वितीयः पटलः** | |
| भवन-दोषाः | १७५ | **पुर-निवेशोचित-द्वार-भवनादिलक्षणम्** | |
| अन्ये दोषाः | १७६ | प्रतोली-लक्षणम् | १६५-१९६ |
| प्लव-दोषाः | ,, | राजालयछत्रादिकम् | १६६-१९८ |
| दुष्टभवनानि | ,, | विद्या-शाला | १९८—१९६ |
| तत्फलानि | ,, | रङ्गशाला | १६९—२०० |
| भङ्गात्तत्फलञ्च | ,, | गोशाला | २००—२०१ |
| वेधः | १७७ | मृगशाला | २०१ |
| तोरण-भङ्गः | ,, | मार्ग-विश्रान्ति-स्थानम् | २०१—२०२ |
| कपोत-प्रवेशः | ,, | वाप्यः | २०२—२०३ |
| गृहदारुभंगशान्तिः | ,, | तटाकाः | २०३ |
| **चतुर्थः खण्डः** | | कूपाः | ,, |
| **राज-निवेशोचित-भवनासन-शय्या-यन्त्रादिलक्षणम्** | | **तृतीयः पटलः** | |
| **प्रथमः पटलः** | | **भवन-सज्जा** | |
| | | सर्वजनोचित-शयनासनादि—शयनानि | |
| **राज-भवन-लक्षणम्** | | शय्या-लक्षणम् | |
| सामान्य-निवेशः | १७८-१७६ | शय्या-द्रव्यम् | २०४ |
| अन्तःपुरम् | १७६ | निषिद्धद्रव्यम् | ,, |
| तत्रैव गवाक्षाः | १७९-१८० | गुणदोषाः | ,, |
| राज-वेश्म—सामान्यनिवेशः | १८०-१८१ | छिद्रभेदाः | ,, |
| प्रमुखराज-भवनानि | १८१ | आसनानि | ,, |
| तत्र विविधाः निवेक्षाः | १८१—१८६ | पादुकादयः | २०४-२०५ |
| राज-वेश्मनां षड् भेदाः | १८५ | मानसारदिशा—आसनानि | २०५ |
| विविधवर्गीय-राजवेश्ममालिका-प्रकराः | १८५-१८६ | शयनम्- | २०५ |
| | | सिंहासनम् | २०६ |
| राज-भवन-निवेशः | १८६—१८८ | तत्र तोरणम् | २०६-३०८ |

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