Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c76.82
Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c76.82
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- English
v2.c76.82
| लक्षणम् | ... | ५७९ | २३१ | पट्टपत्रवर्तनानिर्णयः | ५९१ |
| २२६ | स्वच्छन्दभैरवावतारः | | २३२ | लेपकर्मविधिः ... | ५९२-५९३ |
| स्वच्छन्दभैरवस्यायुधानां | | २३३ | रूपालङ्कारसंयुतं | |
| क्रमवर्णनम् ... | ५८० | चित्रकर्मकथनम् ... | ५९४-५९५ |
| तस्य स्वरूपवर्णनम् ... | ५८० | षोडशव्यालानि-सिंह-गज- | |
| एकविंशतितालमानायास्तस्याः | | अश्व-नरादिक-वृष-मेष-शुक- | |
| मूर्तेरूध्र्वमानम् ... | ५८० | सूकर-महिष-मूषक-कीट- | |
| तत्तिर्यङ्मानकथनम् ... ५८०-५८१ | बानर-हंस-कुक्कुट-मयूर- | |
| तत्पूजामंत्रविधानम् ... ५८१-५८२ | त्रिपल्ली-सर्पव्यालानीति | ५९४ |
| २२७ चित्रपत्रोत्पत्तिनिर्णयः ... ५८३ ५८४ | २३४ स्त्रोपुरुषलक्षणम् ... | ५९६-५९७ |
| २२८ | पत्रजातिकण्टकभेदजीव- | | २३७ | तालवादित्रलक्षणम् ... | ६०९ |
| सूत्रनिर्णयः ... ५८५-५८६ | तालः | ६०९-६१० |
| जातिक्रमच्छन्दतोऽष्टकण्टकाः | वाद्यप्रकारलक्षणम् ... | ६१०-६११ |
| कलि-कलिक-व्यामिश्र--चित्र- | २३८ | सप्तस्वराः | ६१२ |
| कौशल-व्यावर्त-व्यावृत्त--सुभङ्ग- | रागरागिण्यः ... | ६१२-६१३ |
| भङ्गचित्रका इति ... ५७५ | चतुर्दशगीतदोषाः ... | ६१३ |
| अष्टविधकण्टकानागाकृतयो | २३९ | ताण्डवादिमृत्यलक्षणम् | ६१४ |
| जातयश्च ... ५८५-५८६ | | |