Pramāṇa · Search · About · API

भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c10.4

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c10.4

Language
Hindi

c10.4

हिंदुस्तान में अंगरेज़ों का राज्य होने पर फिर विद्या के सूर्य का उदय हुआ और प्राचीन वस्तुओं का मान होने लगा. तारीख १५ जनवरी सन् १७८४ ई. को सर विलियम जोन्स की प्रेरणा से एशिया खंड के प्राचीन शिलालेख, ताम्रपत्र, सिक्के, इतिहास, भूगोल, भिन्न भिन्न शास्त्र, रीत रवाज़, शिल्प आदि विद्या से संबंध रखने वाले सभी विषयों का शोध करने के निमित्त 'एशियाटिक सोसा- इटी' नामक एक समाज भारतवर्ष की उस समय की राजधानी कलकत्ता नगर में स्थापन हुआ, और बहुत से यूरोपियन तथा देशी विद्वान् अपनी अपनी रुचि के अनुसार भिन्न भिन्न विषयों में उक्त समाज का उद्देश्य सफल करने को प्रवृत्त हुए. कितने एक विद्वानों ने ऐतिहासिक विषयों के शोध में लग कर प्राचीन शिलालेख, दानपत्र, सिक्के तथा ऐतिहासिक पुस्तकों का टटोलना प्रारंभ किया. इस प्रकार भारतवर्ष की प्राचीन लिपियों पर प्रथम ही प्रथम विद्वानों की दृष्टि पड़ी.