भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c10.7
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c10.7
- Language
- Hindi
c10.7
ई. स. १७८५ में चार्ल्स विल्किन्स ने दीनाजपुर ज़िले के बदाल नामक स्थान के पास मिला हुआ एक स्तंभ पर का लेख१ पढ़ा, जो बंगाल के राजा नारायणपाल के समय का था२. उसी वर्ष में पंडित राधाकांतशर्मा ने टोपरावाले देहली के अशोक के लेखवाले स्तंभ पर खुदे हुए अजमेर के चौहान राजा आह्नल्लदेव (आना) के पुत्र वीसलदेव (विग्रहराज-चौथे) के तीन३ लेख पढ़े जिनमें से एक [विक्रम] 'सं. १२२० वैशाख शुति १५' का है. इन सब की लिपि बहुत पुरानी न होने से ये आसानी के साथ पढ़े गये, परंतु उसी वर्ष में जे. ऐच. हॅरिंग्टन् ने बुद्धगया के पास वाली 'नागार्जुनी' और 'बराबर' की गुफाओं में उपर्युक्त लेखों से अधिक पुराने, मौखरी वंश के राजा अनंतवर्मन् के तीन लेख पाये, जिनकी लिपि गुप्तों के समय के लेखों की लिपि से मिलती हुई होने के कारण उनका पढ़ना कठिन प्रतीत हुआ, परंतु चार्ल्स विल्किन्स ने ई. स. १७८५ से ८६ तक श्रम कर के उन तीनों लेखों४ को पढ़ लिया जिससे गुप्तलिपि५ की अनुमान आधी वर्णमाला का ज्ञान हो गया.