भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.116
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.116
- Language
- Hindi
c11.116
यह लिपिपत्र पभोसा के २ लेखों१, मथुरा के छोटे छोटे ४ जैन लेखों२ तथा महाक्षत्रप शोडास के मथुरा के लेख३ से तय्यार किया गया है. पभोसा के लेखों के अक्षरों में ‘आ’ की दाहिनी तरफ़ की खड़ी लकीर को नीचे के छोर से बाईं तरफ़ मोड़कर ऊपर की ओर कुछ बढ़ा लिया है, जैसे कि ई. स. की दूसरी शताब्दी से दक्षिण के लेखों में मिलता है. ‘री’ में ‘ई’ की मात्रा और ‘पू’ में ‘ऊ’ की मात्रा में पहिले के लिपिपत्रों से भिन्नता है (देखो, ‘री’ और ‘पू’). मथुरा के लेखों में ‘ख’ और ‘म’ के नीचे के भाग में त्रिकोण बनाया है. तीसरे ‘व’ का सिर त्रिकोण आकृति का (भीतर से खाली) बनाया है जिससे उसकी आकृति विलक्षण हो गई है. ‘ळ’ की आकृति सांची के ‘ळ’ से कुछ विलक्षण है जिसका कारण कलम को उठाये बिना पूरा अक्षर लिखना ही होना चाहिये. महाक्षत्रप शोडास के लेख में ‘ड’ का रूप नागरी के ‘ड’ से किसी प्रकार मिलता हुआ है.