भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c11.30
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.30
- Language
- Hindi
c11.30
२ ‘ऌ’ स्वर वेद में केवल ‘क्लृप्’ धातु में मिलता है और संस्कृत साहित्य भर में उक्त धातु को छोड़ कर कहीं उसका प्रयोग नहीं मिलता. वैयाकरणों ने तोतले बोलने वाले बच्चों के ‘ऋ’ के अशुद्ध उच्चारण के अनुकरण में इसे माना है, तो भी इसके प्लुत का प्रयोग मानने को वे तय्यार नहीं हैं, क्योंकि इसका व्यवहार ही नहीं है. शुक्ल यजुर्वेद के प्रातिशाख्य में अन्य स्वरों से समानता करने के लिये ‘ऌ’ के दीर्घ और प्लुत रूप माने हैं परंतु उनका प्रयोग कहीं नहीं मिलता. ह्रस्व लृकार वाले शब्द के कल्पित संबोधन में प्लुत ‘ॡ ३’ का होना वैयाकरण और कुछ शिक्षाकार मानते हैं, तो भी वास्तव में ‘ऌ’ केवल ह्रस्व ही है.