भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c11.77
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.77
- Language
- Hindi
c11.77
है. ‘द’ का मध्य भाग कहीं कहीं गोलाईदार नहीं किंतु समकोणवाला है. ‘घ’ को कहीं कहीं उलटा भी लिखा है१. ‘ज’ के मध्य की दाहिनी तरफ़ की आड़ी लकीर को कुछ अधिक लंबा कर ‘जा’ बनाने से ‘ज’ और ‘जा’ में भ्रम होने की संभावना रहती थी जिसको स्पष्ट करने के लिये ही लेखक ने ‘ज’ के मध्य की लकीर के अंत में बिंदी बनाकर फिर ‘आ’ की मात्रा का चिह्न लगाया है. जिन अक्षरों का ऊपर का भाग खड़ी लकीरवाला है उनके साथ ‘ई’ की मात्रा गिरनार के लेख की ‘इ’ की मात्रा के समान लगाई है परंतु कुछ नीचे की तरफ़ से, जिससे ‘ई’ की मात्रा का रूप बन जाता है (देखो, ‘पिं’ और ‘ली’ में ‘इ’ और ‘ई’ की मात्राओं का भेद). अनुस्वार का चिह्न कहीं अक्षर के ऊपर परंतु विशेष कर आगे ही धरा है (देखो, ‘पिं’ और ‘भ्युं’)