भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c11.79
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.79
- Language
- Hindi
c11.79
खालसी के चट्टान के लेख की लिपि भद्दी है और त्वरा से लिखी हुई प्रतीत होती है जिससे अक्षर सर्वत्र सम नहीं मिलते और स्वरों की मात्राओं में कहीं कहीं अंतर पड़ गया है (देखो, ‘ता’, ‘शा’, ‘तु’, ‘खे’, ‘गे’ और ‘ले’). एक स्थान में ‘ए’ का रूप ‘ठ’ से मिल गया है. ‘घ’ और ‘ल’ का नीचे का भाग कहीं कहीं गोल नहीं किंतु समकोणवाला बना दिया है (देखो, ‘घ’, और ‘ल’ का दूसरा रूप). ‘छ’ के ऊपरी भाग में < आकृति का सिर बना दिया है जिससे अनुमान होता है कि उस समय किसी किसी लिपि में अक्षरों के सिर भी बनते हों, जिसका कुछ आभास भट्टिप्रोलु के लेखों में स्वरों की मात्रारहित व्यंजनों में होता है. ‘छ’ का नीचे का भाग कलम को उठाये बिना ही (चलती कलम से) लिखा है. ऐसे ही ‘ज’ को भी कहीं कहीं लिखा है जिससे बीच की आड़ी लकीर के स्थान में ग्रंथि हो गई है. अशोक के लेखों में केवल एक यही लेख ऐसा है कि जिसमें ‘श’ और ‘ष’ के रूप मिलते हैं.