भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c12.5
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c12.5
- Language
- Hindi
c12.5
३ मध्यभारत में भी गुप्तकाल के लेख बहुधा उत्तरी शैली के ही मिलते हैं परंतु कहीं कहीं दक्षिणी शैली के भी मिल आते हैं; जैसे कि चंद्रगुप्त ( दूसरे ) का सांची का लेख ( फ्ली ; गु. इं ; लेखसंख्या ५ ); नरवर्मन् का मंदसोर से मिला हुआ मालव ( विक्रम ) सं. ४६१ का ( ऐ. इं ; जि. १२, पृ. ३२०-२१ ) और कुमारगुप्त के समय का मालव ( विक्रम ) सं. ५२६ का (फ्ली ; गु. इं ; लेखसंख्या १८) लेख. उदयगिरि से मिला हुआ चंद्रगुप्त (दूसरे) के समय का एक लेख ( फ्ली; गु. इं ; लेख-संख्या ६ ) उत्तरी शैली की लिपि का है, परंतु वहीं से मिला हुआ उसी राजा के समय का दूसरा लेख ( फ्ली ; गु. इं ; लेख-संख्या ३ ) दक्षिणी शैली का है और वहीं से मिले हुए तीसरे लेख की ( फ्ली ; गु. इं ; लेखसंख्या ६१ ), जो गुप्त संवत् १०६ ( ई. स. ४२५-६ ) का है, लिपि उत्तरी शैली की होने पर भी उसमें दक्षिणी शैली का कुछ कुछ मिश्रण पाया जाता है. इस प्रकार एक ही स्थान के लेखों में भिन्न शैली की लिपियों का मिलना यही बतलाता है कि उनके लेखक भिन्न लिपियों के ज्ञाता थे न कि देशभेद ही इस अंतर का कारण था.