भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c13.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c13.4
- Language
- Hindi
c13.4
२ देवल (युक्तप्रदेश में पीलीभीत से २० मील पर) गांव से मिली हुई वि. सं. १०४६ (ई. स. ६६२) की प्रशस्ति में 'कुटिलाक्षराणि' (विष्णुरेनमनंगने च लिखिता गौडेन करणिकेनैषा। कुटिलाक्षराणि विदुषा तच्चादित्याभिधानेन ॥ ऍ. इं; जि. १, पृ. ८१) और विक्रमांकदेवचरित में 'कुटिललिपिशिः' (नौ कायस्थैः कुटिललिपिमिनों विटैश्चाटदग्धेः १८, ४२) लिखा मिलता है. उनमें 'कुटिल' शब्द क्रमशः अक्षरों तथा लिपि का विशेषण है, परंतु उनमें उस समय की नागरी की, जो कुटिल से मिलती हुई थी, 'कुटिल' संज्ञा मानी है. मेवाड़ के गुहिलवंशी राजा अपराजित के समय की वि. सं. ७१८ (ई. सं. ६६१) की प्रशस्ति के अक्षरों को 'विकटाक्षर' कहा है (यशोभटेन पूज्यमुतकीयैषां विकटाक्षरा ॥ ऍ. इं; जि. ४, पृ. ३२), और अस्पद के लेख में (फ्ली; गु. इं; लेखसंख्या ४२) 'विकटाक्षराणि' लिखा मिलता है. 'विकट' और 'कुटिल' दोनों पर्याय हैं और अक्षरों की आकृति के सूचक हैं.