भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c15.12
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c15.12
- Language
- Hindi
c15.12
यह लिपिपत्र सराहां की प्रशस्ति१ से तैयार किया गया है. इसमें 'ए' के लिये ए की सिर के स्थान की आड़ी लकीर की बाईं ओर [Figure:] चिह्न और जोड़ा है जो वास्तव में 'ए' की मात्रा का एक प्रकार का चिह्न है और कुटिल तथा नागरी लिपि के लेखों में ए, ऐ, ओ और औ की मात्राओं में भी कभी कभी मिलता२ है. पीछे से यही चिह्न लंबा होकर खड़ी लकीर३ के रूप में परिणत होगया (देखो, लिपिपत्र ३१ में बहादुरसिंह के दानपत्र का 'ए'). वर्तमान शारदा 'ए' में इस खड़ी लकीर के अतिरिक्त 'ए' के ऊपर भी नागरी की 'ए' की मात्रा सी मात्रा और लगाई जाती है (देखो, लिपिपत्र ७७). 'द' के मध्य में ग्रंथि लगाई है. 'श' और 'स' में इतना ही भेद है कि पहिले का सिर पूरे अक्षर पर है और दूसरे का दो अंशो में विभक्त है. 'त्' तथा 'म्' में मूल अक्षरों के चिह्न स्पष्ट नहीं रहे. 'ओ' की मात्रा का चिह्न कहीं [Figure:] भी है (देखो, 'यो'), 'औ' की मात्रा कहीं उक्त चिह्न के अतिरिक्त व्यंजन के सिर के अंत में [Figure:] चिह्न और जोड़ कर बनाई है (देखो, 'मौ') और रेफ पंक्ति से ऊपर नहीं किंतु सीध में लगाया है.