भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c16.2
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c16.2
- Language
- Hindi
c16.2
बंगला लिपि भारतवर्ष के पूर्वी विभाग अर्थात् मगध की तरफ़ की नागरी लिपि से निकली है और बिहार, बंगाल, मिथिला, नैपाल, आसाम तथा उड़ीसा से मिलनेवाले कितने एक शिलालेख, दानपत्र, सिक्कों या हस्तलिखित पुस्तकों में पाई जाती है. बंगाल के राजा नारायणपाल के समय, अर्थात् ई. स. की दसवीं शताब्दी तक तो उधर भी नागरी लिपि का ही प्रचार रहा. उक्त राजा के लेखों में केवल 'ए'१, 'ख'२ आदि कुछ अक्षरों में बंगला की ओर झुकाव नज़र आता है. ई. स. की ग्यारहवीं शताब्दी के पालवंशी राजा विजयपाल के देवपारा के लेख३ में ए, ख, ञ, त, म, र, ल और स में नागरी से थोड़ी सी भिन्नता है और कामरूप के वैद्यदेव के दानपत्र४, आसाम से मिले हुए वल्लभेंद्र के दानपत्र५ और हन्नाकोल के लेख६ की लिपियों में से प्रत्येक को नागरी (लिबिपत्र २४-२७) से मिलाया जावे तो अ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ, ख, घ, झ, ञ, ट, थ, प, फ, र, श और ष में अंतर पाया जाता है. इस प्रकार लेखनशैली में क्रमशः परिवर्तन होते होते वर्तमान बंगला लिपि बनी.