भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c17.17
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c17.17
- Language
- Hindi
c17.17
यह लिपिपत्र मंदसोर से मिले हुए राजा नरवर्मन्१ के समय के मालव ( विक्रम ) संवत् ४६१ ( ई. स. ४०४ ) और वहीं से मिले हुए कुमारगुप्त२ के समय के मालव ( विक्रम ) संवत् ५२६ ( ई. स. ४७२ ) के लेखों से तय्यार किया गया है. नरवर्मन् के समय के लेख में ‘य’ प्राचीन और नवीन ( नागरी का सा ) दोनों तरह का मिलता है. दक्षिणी शैली के अन्य लेखों में ‘य’ का दूसरा ( नागरी का सा ) रूप केवल संयुक्ताक्षर में, जहां ‘य’ दूसरा अक्षर होता है, प्रयुक्त होता है परंतु यह लेख उत्तरी भारत का है, इसलिए इसमें वैसे रूप का भी केवल ‘य’ के स्थान में प्रयोग हुआ है. ‘रु’ का दूसरा रूप ‘उ’ की मात्रा सहित ‘र’ को चलती कलम से लिखने से बना है, शुद्ध रीति से लिखा हुआ रूप तो पहिला ही है. ‘इ’ में दो बिंदियों के ऊपर की सीधी आड़ी लकीर को वक्र रेखा बना दिया है.